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Monday, June 27, 2022
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    दिल्ली की हवा को प्रदूषित कर रहा है वाहन और कूड़े का धुंआ

    दिल्ली: अभी हाल ही में स्विस कंपनी द्वारा जारी प्रदूषित राजधानियों की सूची में दिल्ली पहले स्थान पर रही है. इस रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी में पीएम 2.5 का स्तर 84.1 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर मापा गया है. इस प्रदूषण के लिए दिल्ली में सबसे जयदा दो चीज़ें जिम्मेदार हैं, इसमें वाहन से निकलने वाला जहरीला धुएं से उत्पन्न होने वाली सल्फर व नाइट्रोज डायोक्साइड गैस व कूड़ा जलने से उत्पन्न होने वाला धुआं प्रमुख है.

    रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदूषित राजधानियों की सूची में दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर बांग्लादेश की राजधानी ढका (77.1), अफगानिस्तान की राजधानी काबुल (46.5) व कतर की राजधानी दोहा (44.3) से भी अधिक रहा है. हालांकि, राहत भरी बात यह है कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष दिल्ली के प्रदूषण में 15 फीसदी की कमी आई है.

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    ठोस कचरे को जलाने और वाहनों के धुंए से निकलता है PM 2.5
    केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अपर निदेशक डॉ. सुशील कुमार त्यागी ने बताय कि पीएम 2.5 का उत्सर्जन तेल व डीजल के जलने से भी होता है. तेल व कोयला जलने से हवा में सल्फर डायोक्साइड (एसओ2) उत्पन्न होता है, इनसब का प्रमुख कारण यह भी है कि दिल्ली में निजी वाहनों की संख्या अधिक होना व इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या कम होना. जीवाशम ईंधन जैसे गौसोलीन जलने से नाट्रोजन डायोक्साइड(एनओ2) उत्पन्न होता है. और वहीँ दूसरी तरफ पत्ते, कचरा, प्लास्टिक व पराली जलाने से भी पीएम 2.5 उत्पन्न होता है.

    CPCB के पूर्व अपर निदेशक डॉ. दीपांकर साहा ने कहा कि प्रदूषित शहरों की सूची में स्थान पाने वाले 22 शहर इंडो-गैगनेटिक प्लेन क्षेत्र में आते हैं. दिल्ली भी इसी क्षेत्र का हिस्सा है. इस क्षेत्र में आने वाले शहरों में धूल भरी हवाएं अधिक रहती है। वहीं, दिल्ली में 365 दिनों से केवल 30 से 32 दिन तक ही बारिश होती है. इसके अलावा बाकी दिन सूखे रहते हैं. यही वजह है कि दिल्ली के प्रदूषण को कम करने के लिए बारिश भी अपनी भूमिका नहीं निभा पाती है.

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