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Tuesday, June 28, 2022
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    महिलाओं के हक के लिए फिर सामने आया सुप्रीम कोर्ट

    दिल्ली: महिलाओं के अधिकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट सामने आया है. भारतीय सेना (Army) और नौसेना (Navy) में परमानेंट कमीशन में महिला अधिकारियों (Women Officers) को लेकर कोर्ट ने बड़ा सवाल पूछा है. सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि क्या सेना, नौसेना में परमानेंट कमीशन में शामिल होने के लिए पुरुषों की तरह ही महिला अधिकारियों के लिए मेडिकल मानदंड (Medical Standards) लागू किए जा सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिलाएं प्रसव, रजोनिवृत्ति से गुजरती हैं और उनका शरीर प्रभावित होता है. इसको नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है.

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    अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया कि इस साल जनवरी से वेतन नहीं मिलने की शिकायत करने वाली महिला अधिकारियों को शुक्रवार तक वेतन का भुगतान करे. सुप्रीम कोर्ट ने पहले इन महिला अधिकारियों को सेवा मुक्त करने पर रोक लगा दी थी. अदालत ने उन महिला अधिकारीयों की सुनवाई कर रही थी जिन्होंने परमानेंट कमीशन में शामिल होने के मामले में लैंगिक पक्षपात का आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था. उनके वकीलों ने पुरुषों और महिलाओं के लिए लागू दो अलग-अलग मानदंडों को बताया जिसमें से एक चिकित्सा मानदंड और दूसरा सीआर- गोपनीय रिपोर्ट था. उन्होंने ये भी बताया कि पुरुष अधिकारीयों के लिए 30 वर्ष की आयु में उनकी चिकित्सा स्थिति का आकलन किया जाता है जबकि महिलाओं के लिए यह 38 से 40 वर्ष की आयु में लागू किया जाता है.

    जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हम सोच रहे हैं, कि क्या हम कह सकते हैं कि पुरुषों की तरह महिलाओं के लिए भी यही किया जाना चाहिए. वे प्रसव पीड़ा से गुजरती हैं और शरीर प्रभावित होता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. जिन महिलाओं को परमानेंट कमीशन के लिए विचार करना चाहिए था, उनकी शारीरिक दुर्बलता की स्थिति पर अब नकार दिया गया है.

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