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Tuesday, June 28, 2022
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    उत्तराखंड में छाया बाढ़ का खतरा, जाने क्यों टूटते है ग्लेशियर

    दिल्ली: उत्तराखंड के चमोली के पास ग्लेशियर टूटने से हिमस्खलन हुआ है. भरी तबाही की आशंका जताई जा रही है. राज्य में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है. बता दें ग्लेशियर की बर्फ धौलीगंगा नदी में बह रही है. अभी 100-150 लोगों के हताहत की आशंका जताई जा रही है. इस तबाही से ऋषिगंगा और तपोवन प्रोजेक्ट को भरी नुक्सान हुआ है. अलकनंदा नदी के किनारे रहने वालों फ़ौरन सुरक्षी जगह जाने को कहा गया है. साथ ही साथ श्रीनगर और ऋषिकेश डैम को खली करा दिया गया है.

    क्यों आती है ग्लेशियर टूटने से बाढ़
    सालों तक भरी मात्रा में जब एक जगह बर्फ जमा हो जाती है तो वो ग्लेशियर बन जाता है. अमूमन ग्लेशियर दो प्रकार के होते हैं- अल्पलाईन ग्लेशियर और आइस शीट्स. लेकिन पहाड़ों के ग्लेशियर अल्‍पाइन कैटेगरी के माने जाते हैं. पहाड़ियों पर ग्लेशियर फटने और टूटने के कई कारण होते हैं. गुरुत्वाकर्षण की वजह से और दूसरा ग्लेशियर के किनारों पर टेंशन बढ़ने की वजह से. ग्लोबल वार्मिंग भी ग्लेशियर टूटने का कारन हो सकती है. जब कभी ग्लेशियर से कोई बड़ा बर्फ का टुकड़ा अलग ही जाता है तो उसे क्लोविंग कहते हैं.

    यहां भी पढ़ें: उत्तराखंड के चमोली में टूटा ग्लेशियर, 150 लोगों के बहने का आशंका

    ग्लेशियर टूटने से आने वाली बाढ़ भयानक होती है, आमतौर पर ऐसा तब होता है जब ग्लेशियर के अंदर ड्रेनेज ब्लॉक होती है. उसके बाद पानी निकलने का रास्ता ढूढ़ लेता है. जब वो ग्लेशियर के बीच से बेहता है, तो बर्फ के पिघलने का रेट बढ़ जाता है. इससे पानी का रास्ता बड़ा हो जाता है और पानी के साथ बर्फ भी बड़ी मात्रा में पिघलने लगती है. इंसाइक्‍लोपीडिया ब्रिटैनिका के अनुसार, इसे आउटबर्स्‍ट फ्लड (Outburst flood) कहते हैं. कभी- कभी ग्लेशियर हर साल टूटते हैं और कभी तीन साल के अंतर पर और कुछ ग्लेशियर कब टूटेंगे उसका अनुमान नई लगाया जा सकता है

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