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Thursday, May 19, 2022
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    Ratlam News: महालक्ष्मी का अनोखा मंदिर, जहां सोने-चांदी और हीरे जेवरात से सजती हैं माता रानी

    भारत के ह्रदय में रहने वाला मध्यप्रदेश का रतलाम जिला यूं तो देश मे अपनी ख्याति सेव (नमकीन) साड़ी और सौना (शुद्ध 24 कैरेट) से जाना जाता है और ये तीनो अति प्राचीन समय से प्रसिद्ध है। लेकिन शहर के बीचों बीच स्थित महालक्ष्मी मंदिर है। जो विश्व प्रसिद्ध हैं। यंहा पर भारत के अनेक बड़े राज्यों, शहरों सहित अन्य देशों से भी दीपावली पर्व पर महालक्ष्मी मंदिर के दर्शनार्थियों और सनातन संस्कृति के लोग दर्शन व अपने करोडों रुपए, रकम सोने चांदी के जेवरात हीरे मोती आभूषण इत्यादि लेकर आते है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यहां दीपावली पर नोटों और सोने के आभूषणों की लड़ियों से सजावट होती है। महालक्ष्मी मंदिर में लगने वाली लड़ियों की कीमत लाखों में होती है।
    मंदिर के गर्भगृह में भी देवी महालक्ष्मी का आकर्षक श्रृंगार किया जाता है। इसमें भी बेशकीमती हीरे-मोती और जवाहरातों से निर्मित स्वर्ण आभूषण उपयोग किए जाते हैं। इतना ही नहीं, कई दर्शनार्थी और देवी महालक्ष्मी के भक्त अपने घरों से सोने-चांदी के सिक्के और अन्य आभूषण यहां लेकर यहाँ सजावट के लिए लेकर पहुंचते हैं। शहर के हृदय स्थल माणक चौक क्षेत्र में स्थित यह मंदिर अपने आप में अद्वितीय हैं।

    हमारा देश में चमत्कारी मंदिरों की कमी नहीं है। यही कारण है कि यहां के अनुयायियों में प्रगाढ़ आस्था रहती हैं। यहां कई ऐसे चमत्‍कारिक धर्मस्थल हैं, जिनसे जुड़े रहस्‍य आज भी अनसुलझे हैं। इन मंदिरों से जुड़े रहस्यों और मान्यताओं के चलते लोग दूर-दूर से यहां दर्शन करने आते हैं। रतलाम का महालक्ष्मी मंदिर भी ऐसे विशेष मंदिरों में शामिल है। मान्‍यता है कि यहां दीपावली पर्व पर रखे गए सोना चांदी, आभूषण और नकद राशि रखने से महालक्ष्मी के आशीर्वाद से वो दुगने हो जाते हैं। साथ ही घर और दुकान में भी बरकत बनी रहती है। इन्हीं आस्थाओं और मान्यताओं को लेकर यहां पर भक्त उमड़ पड़ते हैं और घंटों इंतजार कर अपना रुपया सोना-चांदी तथा स्वर्ण आभूषण यहां जमा करते हैं। दीपावली के मौके पर इस मंदिर की सजावट आंखें चौंधियाने वाली होती है। हां प्रतिवर्ष सजावट के लिए करोड़ों रुपए नकदी और कई किलो सोना सजावट में इस्तेमाल होता है।

    आभूषणों और नकदी का हिसाब

    इस मंदिर को लेकर मान्‍यता है कि धनतेरस से पहले पुष्प नक्षत्र से लेकर भाईदूज के बीच माता महालक्ष्मी के चरणों में दर्शनार्थियों द्वारा रुपए, रकम सौने चांदी के आभूषणों और हीरे जेवरात आदि से इनके दरबार में जो कुछ चढ़ाया जाता है, उसमें बरकत रहती है। इसलिए भक्त अपना सोना-चांदी लेकर पहुंचते हैं और उसे माता के चरणों में चढ़ाते हैं। ऐसा करने से उनके यहाँ सालभर सुख-समृद्धि रहती है। दीपावली पर्व समाप्त हो जाने पर भक्तों को उनका सोना-चांदी और रुपया वापस कर दिया जाता है। जो भक्त यहां स्वर्ण आभूषण और नकदी लेकर आते हैं, बकायदा उसका हिसाब-किताब रखा जाता है। इसके लिए उनके पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज जमा कराए जाते हें.और लौटाते समय पुनः कागजी कार्यवाही पूरी होती है।

    प्रशासन के पुख्ता इंतजाम

    जिला प्रशासन का इस मंदिर की व्यवस्थाओं को अपने कमांड में रखता है। एसडीएम और तहसीलदार यहां व्यवस्थाओं पर नजर लगाए रखते हैं। जिसका मुख्य कारण यह मंदिर ‘कोर्ट ऑफ वार्ड्स’ के अधीन है और ऐसे मंदिरों की व्यवस्था जिला प्रशासन देखता है। इस दौरान यह मंदिर सीसीटीवी कैमरों और पुलिस के सख्त पहरे में रहता है। मंदिर की नोटों से सजावट का सिलसिला शुरू हो चुका है।

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