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Tuesday, June 28, 2022
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    पीएम ने सुहेलदेव स्मारक का किया शिलान्यास, कहा- इतिहास में हमारे सैनिकों को उचित सम्मान नहीं मिला

    दिल्ली : मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए श्रावस्ती के महान योद्धा महाराज सुहेलदेव की 4.20 मीटर ऊंची प्रतिमा के निर्माण समेत स्मारक का वसंत पंचमी के दिन शिलान्यास किया. इस दौरान उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह बहराइच स्थित कार्यक्रम स्थल चित्तौरा में मौजूद रहे.

       प्रधानमंत्री ने महाराज सुहेलदेव की जयंती के उपलक्ष्य में उत्तरप्रदेश के बहराइच की चित्तौरा झील के विकास कार्यों का भी शिलान्यास किया. इसमें महाराज सुहेलदेव की एक घोड़े पर सवार प्रतिमा की स्थापना, कैफेटेरिया, अतिथी गृह और बच्चों के पार्क जैसी विभिन्न पर्यटक सुविधाओं को शामिल किया गया है.

      भारत का इतिहास वह नहीं जो  गुलामी मानसिकता से लिखा- पीएम

     कार्यक्रम के संबोधित करते हुए पीएम ने कहा, ‘आज महाराज सुहेलदेव जी के नाम पर बनाए गए मेडिकल कॉलेज को एक नया और भव्य भवन मिला है. भारत का इतिहास सिर्फ वो नहीं है, जो देश को गुलाम बनाने वालों, गुलामी की मानसिकता के साथ इतिहास लिखने वालों ने लिखा, भारत का इतिहास लिखने वो भी भी है जो भारत के सामान्य जन में, भारत की लोकगाथाओं में रचा-बसा है.जो पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ा है.’

      दरअसल मोदी सरकार एनसीआरटी के सिलेब्स में भी कुछ बदलाव करना चाहती है. एक दक्षिणपंथी समिती ने भी  केंद्र को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें बच्चों की किताबों में मुगलों के  अधिक उल्लेख पर आपत्ति दर्ज की गई थी. समिती ने यह निर्णय लिया कि बच्चों के सिलेब्स में 2024 तक मुगलों के उल्लेख को कम करके भारतीय राजाओं और स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियां एनसीआरटी के पाठ्यक्रम में रखी जाएगी और नवीन पाठ्यक्रम लाने का काम जल्द ही उच्च कक्षाओं के लिए भी किया जाएगा ताकि उन्हें उचित सम्मान मिल सके.

    चौरा-चौरी के श्रमिकों का अपमान हम नहीं भूल सकते- पीएम

    प्रधानमंत्री ने कहा, ‘ बीते कुछ सालों में देशभर में इतिहास, आस्था, आध्यात्म, संस्कृति से जुड़े जितने भी स्मारकों का निर्माण किया जा रहा है, उनका बहुत बड़ा लक्ष्य पर्यटन को बढ़ावा देने का भी है. उत्तरप्रदेश तो पर्यटन, तीर्थाटन दोनों के मामले में समृद्ध भी है और इसकी क्षमताएं अपार है.
     उन्होंने कहा, ‘भारत के अनेक ऐसे सेनानी हैं, जिनके योगदान को अनेक वजहों से मान नहीं दिया गया. चौरी-चौरा वीरों के साथ जो हुआ, वो क्या हम भूल सकते हैं.’

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