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Tuesday, June 28, 2022
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    पराक्रम दिवस: सुभाष चंद्र बोस की 125 वीं जयंती पर सियासत भी हुई तेज

     स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125 वीं जयंती पर राष्ट्र उन्हें नमन कर रहा है.  भारत अपने सबसे बड़े स्वतंत्रता संग्राम के नेता का जन्मदिन पराक्रम दिवस के रूप में मनाता है.नेताजी का जन्मदिन 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक शहर में हुआ था. बोस  जानकीनाथ बोस और प्रभावती जी की नौवीं सतान थे. बोस का बचपन से मन पढ़ाई-लिखाई में रमता था.

      पिता चाहते थे बेटा बने आईसीएस-

       पेशे से वकील जानकीनाथ बोस चाहते थे कि उनका बेटा आईसीएस बने लेकिन उनकी आयु के हिसाब से उनके पास परीक्षा में उत्तीर्ण करने का एक ही मौका था. उन्होंने अपने पिता से रात भर सोचने का समय मांगा कि उन्हें क्या करना है . अंत में उन्होंने परीक्षा देने का निर्णय लिया लेकिन उनके लिए ये इतना आसान नहीं था. बोस को आईसीएस की तैयारी के लिए इंग्लैंड के किसी कॉलेज में दाखिला नहीं मिला. देखा जाए तो बोस के संघर्ष की शुरूआत यही से हुई. दाखिला न मिलने पर उन्होंने हार नहीं मानी और किसी तरह किट्स विलियम हॉल में मानसिक एवं नैतिक विज्ञान की ट्राइपास (ऑनर्स) की परीक्षा का अध्ययन करने हेतु उन्हें प्रवेश मिल गया. इससे उनके रहने व खाने की समस्या हल हो गयी. एडमीशन लेना तो बहाना था असली मकसद तो आईसीएस में पास होकर दिखाना था. सो उन्होंने 1920 में वरीयता सूची में चौथा स्थान प्राप्त करते हुए पास कर ली.

        असहयोग आंदोलन से हुई थी शुरूआत-

    आईसीएस बनने के बाद भी सुभाष के मन पर स्वामीविवेकानंद और अरविंद घोष के आर्दशों पर गहरा प्रभाव पड़ा और उन्होंने आईसीएस की नौकरी छोड़ दी. सुभाष के मन पर देशबंधु चितरंजन दास(देशबाबू) का भी गहरा प्रभाव था . वे इंग्लैंड से नौकरी छोड़कर देशबाबू से मिलने आए और गांधी जी के असहयोग आंदोलन के सहभागी बन गए.बोस को कभी किसी पद का लालच नहीं था . उन्होंने देश सेवा के लिए अच्छी नौकरी और सुविधाओं का भी त्याग कर दिया था. फिर उनका अपना संघर्ष शुरू हुआ. तुम मुझे खुन दो , मैं तुम्हें आजादी दूंगा , जैसे नारों से देश की स्वतंत्रता की इबारत लिखी.

      आज सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर हर राजनीतिक पार्टी उनके विचारों और आदर्शों को अपना बता रही है. उनके संघर्षों को आगे बढ़ना अपना दायित्तव बता रही है. बंगाल चुनाव के मद्देनजर पार्टियों में सुभाष जी को अपना लीडर बताने की होड़ लगी है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बंगाल में नेताजी के जन्मदिवस पर सूबे की जनता को संबोधित करेंगे.उन्होंने ट्वीट करके कहा कि नेताजी भारतमाता सच्चे वीरसपूत है. वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बोस की जयंती पर कोलकाता के श्याम बाजार से रेड रोड तक 9 किलोमीटर लंबे रोड शो की शुरूआत की है. इस रोड शो में बड़े पैमाने पर भीड़ उमड़ी है. चुनावी माहौल में कोई भी राजनीतिक पार्टी प्रचार का एक भी मौका नहीं छोड़ना चाहती है.  

     

     

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