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Thursday, October 6, 2022
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    कोरोना मरीजों को मिल सकेगी ऑक्सीजन, DRDO ने बनाया “ऑक्सीजन डिलिवरी सिस्टम”

    कोरोना महामारी के कारण मचे हाहाकार के बीच देश भर में इस बीमारी से लड़ने के लिए लगातार नए-नए कदम उठाए जा रहे हैं. इस कड़ी में देश की रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी Defence research and development organisation(DRDO) ने एक राहत भरी खबर सुनाई है. डीआरडीओ ने ज्यादा उंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए एसपीओ2 के आधार पर सप्लीमेंटल आक्सीजन डिलिवरी सिस्टम बनाया है. जो कि इस महामारी के दौर में कोविड मरीजों के इलाज के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा. यह ऑक्सीजन डिलिवरी सिस्टम एसपीओ2 के आधार पर व्यक्ति के शरीर में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करता है और उसे हाईपोक्सिया की स्थिति में जाने से रोकता है.

    जान लिजिए कि क्या है ये SPO2 और हाईपोक्सिया?

    इस पूरे सिस्टम को समझने में हो सकता है कि आपके रास्ते में ये एसपीओ2 और हाईपोक्सिया नाम के दो शब्द रोड़ा बन रहे हों. ऐसी स्थिति में पहले हमें एसपीओ2 और हाईपोक्सिया को समझ लेने की जरूरत है. एसपीओ2 यानी कि Blood oxygen saturation स्तर. इसे ऐसे कह सकते हैं कि SPO2 एक तरह का मात्रक है, जो यह बताता है कि आपके शरीर में टीशूज तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन का लेवल क्या है. यानी कि आपके शरीर में टीशूज और सेल्स तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा ही एसपीओ2 मतलब आक्सीजन सैचुरेशन लेवल है.

    गौरतलब है कि आपके शरीर में एसपीओ2 की सामान्य रेंज 95% से 100% होती है. वहीं 90% से कम एसपीओ2 लेवल होने पर व्यक्ति हाईपोक्सिया की स्थिति में पहुंच जाता है. हाइपोक्सिया यानी एक ऐसी अवस्था, जिसमें टिशूज़ तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा शरीर की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कम हो जाती है. कोरोना संक्रमण के कारण लोग इसी स्थिति में पहुंच जाते हैं और उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है. वहीं अब डीआरडीओ की ओर से बनाया गया ये सप्लीमेंटल आक्सीजन डिलिवरी सिस्टम शरीर में एसपीओ2 की मात्रा कम होने पर शरीर में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करेगा.

    ऑटोमेटिक है ये सप्लीमेंटल आक्सीजन डिलिवरी सिस्टम:

    डीआरडीओ की बेंगलुरु स्थित डिफेंस बायो-इंजीनियरिंग एंड इलेक्ट्रो मेडिकल लेबोरेट्री (डीईबीईएल) की ओर से बनाया गया यह सिस्टम ऑटोमेटिक है. यह सिस्टम व्यक्ति के हाथ पर बंधे पल्स आक्सीमीटर माड्यूल के जरिये एसपीओ2 स्तर की निगरानी करता है. साथ ही वायरलेस इंटरफेस के माध्यम से व्यक्ति को हल्के वजन के पोर्टेबल सिलेंडर से आक्सीजन को ऑटोमेटिकली नियंत्रित करता है. यह सिस्टम कई साइजों में उपलब्ध होगा. इनमें एक लीटर और एक किग्रा वजन के साथ 150 लीटर की आक्सीजन आपूर्ति से लेकर 10 लीटर और 10 किग्रा वजन के साथ 1,500 लीटर आक्सीजन आपूर्ति का साइज शामिल है. वहीं 1,500 लीटर आक्सीजन आपूर्ति साइज वाला सिस्टम दो लीटर प्रति मिनट के लगातार फ्लो के साथ 750 मिनट तक चल सकता है.

    वरदान साबित हो सकता है यह “सप्लीमेंटल आक्सीजन डिलिवरी सिस्टम”:

    यह सप्लीमेंटल आक्सीजन डिलिवरी सिस्टम महामारी के दौर में काफी लाभदायक साबित हो सकता है. यह सिस्टम कोविड के वो मरीज जिनके अंदर बहुत गंभीर लक्षण नहीं हैं, उनका घर पर ही इलाज किए जाने में काफी कारगर होगा. यह उन मरीजों की ऑक्सीजन फ्लो थेरेपी में 2/5/7/10 lpm के फ्लो पर ऑक्सीजन की कमी को पूरा कर सकेगा. इस सिस्टम को जमीनी हालात में अभियानों के लिए स्वदेश में ही विकसित किया गया है. इसकी दो खूबियां हैं, एक तो यह काफी मजबूत है और दूसरा यह सस्ता भी है. इसे कम दबाव, कम तापमान और ह्यूमिडिटी और उंचे पर्वत वाले क्षेत्रों में काम करने के लिहाज से डिजायन किया गया है.

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