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Sunday, June 26, 2022
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    बिना बताए नजरबंद करना लोकतंत्र का नया मॉडल है – उमर अब्दुल्ला

    दिल्ली : पुलवामा हमले की बरसी के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह , गृहमंत्री  अमित शाह और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सभी ने 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 40 जवान जो एक आंतकी हमले में शहीद हो गए थे. उनको श्रद्धांजलि दी और याद किया.

       वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेस के नेता फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उनके बेटे उमर अब्दुल्ला को उनके ही घर में कैद कर दिया गया है. यह बात उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट करके बताई. वहीं पूर्व सीएम और पीडीपी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती को शनिवार को पुलवामा जाने की इजाजत नहीं दी गई.

      उमर अब्दुल्ला आज गुलमर्ग जाने वाले थे, वहीं उनके पिता फारूक अब्दुल्ला कश्मीर घाटी के गांदरबल क्षेत्र को दौरा करने वाले थे. हालांकि पुलिस ने उन्हें पुलवामा हमले की बरसी के कारण नजरबंद रखने का कदम उठाया लेकिन ये कोई पहली बार नहीं है, जब कश्मीर के प्रमुख नेताओं को शांति और सुरक्षा के नाम पर बिना उनकी इजाजत और जानकारी के नजरबंद किया गया हो.

       नेशनल कांफ्रेस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया, ‘यह’ अगस्त 2019 के बाद का नया जम्मू-कश्मीर है. बिना कुछ बताए हमें अपने घरों में कैद किया गया है.यह बहुत गलत बात है कि उन्होंने मेरे सांसद पिता और मुझे अपने ही घर में कैद कर दिया है. इसी तरह उन्होंने मेरी बहन और उनके बच्चों को उनके घर में कैद कर दिया है.

       आगे उमर अब्दुल्ला ने कहा, चलो, आपके लोकतंत्र के नए मॉडल का मतलब है कि बिना किसी स्पष्टीकरण के हम अपने घरों में बंद रखा जाता है, लेकिन घर में काम करने वाले स्टाफ को भी काम करने के लिए घर में आने की इजाजत नहीं दी जा रही है और फिर आपको हैरानी होगी कि मैं अब भी नाराज हूं.

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