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Thursday, June 23, 2022
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    असंतुष्टों को चुप कराने के लिए नहीं कर सकते राजद्रोह कानून का इस्तेमाल: पटियाला हाउस कोर्ट

    दिल्ली: दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने राजद्रोह कानून को लेकर बड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा है कि उपद्रवियों पर लगाम लगाने के नाम पर असंतुष्टों को चुप करने के लिए राजद्रोह के कानून का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. अडीशनल सेशंस जज धर्मेंद्र राना ने किसान आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर फेक वीडियो पोस्ट कर अफवाह फैलाने और राजद्रोह करने के दो आरोपियों को जमानत देते हुए ये टिपण्णी की. कोर्ट ने स्वरूप राम और देवीलाल बड़दाक को इस मामले में जमानत देदी है. इस महीने ही दिल्ली पुलिस ने इन दोनों को गिरफ्तार किया था.

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    स्वरूप राम और देवीलाल बड़दाक पर ये आरोप था कि इन्होने फेसबुक पर ये पोस्ट किया था कि किसानों के समर्थन में दिल्ली में 200 पुलिसवालों ने इस्तीफा दे दिया है. कोर्ट ने कहा समाज में शांति और लॉ ऐंड ऑर्डर को बरकरार रखने के लिए राजद्रोह का कानून सरकार के हाथ में एक ताकतवर औजार है लेकिन इसका इस्तेमाल असंतुष्टों को चुप करने के लिए नहीं किया जा सकता। 15 फरवरी को अपने आदेश में न्यायधीश ने कहा कि ”आदेश में कहा गया कि हिंसा, अथवा किसी तरह के भ्रम अथवा तिरस्कारपूर्ण टिप्पणी या उकसावे के जरिये आरोपियों के द्वारा सार्वजनिक शांति में किसी तरह की गड़बड़ी या अव्यवस्था फैलाने के अभाव में मुझे संदेह है कि आरोपी पर धारा 124 (ए) के तहत कार्रवाई की जा सकती है. न्यायाधीश ने कहा, “मेरे विचार में, आरोपियों को जिस टैगलाइन के लिये जिम्मेदार बताया गया है उसे सीधे तौर पर पढ़कर IPC की धारा 124ए लगाना बहस का गंभीर मुद्दा है.”

    अदालत ने दोनों आरोपी व्यक्तियों को 50 हजार की जमानत और इतनी ही रकम के दो मुचलकों पर जमानत देते हुए यह कहा कि पुलिस ने अब उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की आवश्यकता नहीं जताई है.

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