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Monday, June 27, 2022
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    पीरियड के आधार पर महिलाओं के बहिष्कार पर बैन होना चाहिए- गुजरात हाईकोर्ट

    गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि सभी जगहों पर महिला के मासिक धर्म की स्थिति के आधार पर उनके बहिष्कार पर प्रतिबंध होना चाहिए. दरअसल कच्छ के एक हॉस्टल में लड़कियों की पीरियड को लेकर की गई तलाशी के बाद हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी. इसपर मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी.

    हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार इस केस में सामाजिक जागरुकता अभियान चलाना चाहिए. इस मसले पर हाईकोर्ट ने गुजरात सरकार, केन्द्र सरकार व महिला आयोग को जवाब देने के लिए तलब किया है. यह सुनवाई जस्टिस जेबी पारदीवाला व जस्टिस इलेश जे वोरा की बेंच के सामने इस याचिका की सुनवाई हुई.

    ये मामला 18 फरवरी 2020 का था. भुज सिटी के सहजानंद गर्ल्स इंस्टीट्यूट के एक हॉस्टल में 60 से ज्यादा लड़कियों को कथित तौर पर ये साबित करने के लिए मजबूर किया गया कि वह मासिक धर्म से नहीं गुजर रही हैं. स्नातक की पढ़ाई कर रही लड़कियों को कॉलेज घुमाते हुए रेस्ट रूम तक ले जाया गया. वहां सभी से कहा गया कि वह साबित करें कि मासिक धर्म से नहीं गुजर रही हैं, इसके लिए उनसे अंत वस्त्र उतारने को कहा गया था.

    इस मामले में प्रिंसिपल व हॉस्टल की रेक्टर को अरेस्ट किया गया था. इस घटना के बाद निर्झरी मुकुल सिन्हा ने मासिक धर्म के आधार पर महिलाओं को बहिष्कार की प्रथा खत्म करने की जनहित याचिका दायर की थी.      

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