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Tuesday, June 28, 2022
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    सभी धर्मों में तलाक संबंधी एक कानून बनाने वाली याचिका का एआईएमपीएलबी ने सुप्रीम कोर्ट में किया विरोध

    दिल्ली : ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड(एआईएमपीएलबी) ने सुप्रीम कोर्ट में सभी धर्मों में तलाक संबंधी एकसमान कानून बनाने वाली याचिका का विरोध किया है. जिसमें सभी धर्मों में तलाक के लिए एक कानून बनाने की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में कहा गया कि सभी धर्मों में मेंटेनेंस यानी रखरखाव और एलिमोनी यानी निर्वाह धन के लिए एक ही कानून होना चाहिए. तलाक की स्थिति में पति को अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता देना होता है, जिससे पत्नी अपना जीवनयापन कर सके.

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    फिलहाल हर धर्म में ये नियम अलग हैं लेकिन अब इसके लिए एक कानून बनाने की मांग की जा रही है. फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसपर कोर्ट ने सरकार से राय मांगी है. अब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी खुद को इस मामले में पक्षकार बनाने की मांग की है. बोर्ड में अपनी अर्जी में कोर्ट में कहा कि पर्सनल लॉ का सम्मान होना चाहिए. हिंदुओं में भी अलग-अलग नियम-कानून से विवाह औऱ तलाक होते  है. बोर्ड ने अपनी याचिका में कहा कि ये याचिका लोगों का पर्सनल लॉ में दखल है. दरअसल हर महिला को अधिकार है कि वो पर्सनल लॉ से हटकर मेंटेनेंस और एलिमोनी की मांग रख सकती हैं.  

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