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Tuesday, June 28, 2022
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    4 सरकारी बैंक हो सकते हैं प्राइवेट, क्या आपका पैसा रहेगा सेफ

    दिल्ली: सरकार ने चार सार्वजानिक क्षेत्र के बैंकों को निजीकरण के लिए शॉर्टलिस्ट किया है. उन बैंक्स में, बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र (Bank of Maharashtra), बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India), इंडियन ओवरसीज बैंक (Indian Overseas Bank) और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank of India) शामिल हैं. सरकार राजस्व कमाने के लिए इन बैंक्स को बेचना चाहती है. ताकि उन पैसों का उपयोग सरकारी योजनाओं पर हो सके. सवाल ये है कि क्या इन बैंक्स में लोगों का पैसा सुरक्षित रहेगा.

    सरकार बैंकिंग सेक्टर में प्रिविनिजीकरण टू-टायर बैंकों के साथ स्टार्ट करना चाहती है. इस महीने की शुरुआत में बजट 2021-22 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजानिक क्षेत्र के दो बैंकों के प्राइवेटाइजेशन की घोषणा की थी. बैंक यूनियनों के मुताबिक बैंक ऑफ इंडिया में लगभग 50,000 कर्मचारी हैं और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों की संख्या 33,000 है, जबकि इंडियन ओवरसीज बैंक में 26,000 और बैंक ऑफ महाराष्ट्र में लगभग 13,000 कर्मचारी हैं.

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    निजीकरण के लिए दो अधिनियमों का संशोधन
    सरकार इस साल पब्लिक एरिया के बैंकों के निजीकरण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए दो अधिनियमों में संशोधन लाएगी। निजीकरण के लिए बैंकिंग कंपनियां (उपक्रमों का अधिग्रहण व हस्तांतरण) अधिनियम, 1970 और बैंकिंग कंपनियां (उपक्रमों का अधिग्रहण व हस्तांतरण) अधिनियम, 1980 में संशोधन आवश्यक होगा.

    क्या इन बैंक्स में आपका पैसा सेफ है
    बता दें की अगर आपका इनमे से किसी भी बैंक में खता है तो चिंता की कोई बात नहीं है. क्योंकि ग्राहकों का पैसा पूरी तरह सेफ है, भारत सरकार का उद्देश्य विभिन्न सामाजिक क्षेत्र और विकासात्मक कार्यक्रमों के वित्तपोषण के लिए विनिवेश आय का उपयोग करना है. और उन पैसों का उपयोग सरकारी योजनाओं पर हो सके.

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