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Wednesday, June 29, 2022
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    26 जनवरी हिंसा: अब किसान नेता भी जांच में शामिल होने के लिए तैयार

    दिल्ली: दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर कुछ किसान नेता दिल्ली पुलिस की जांच में शामिल होने के लिए तैयार हो गए हैं, इन नेताओं में सिंधु बॉर्डर में गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे राकेश टिकैत और उनके साथ के कुछ नेता शामिल है. बातचीत में इन नेताओं ने अगले कुछ दिनों में पूछताछ में शामिल होने की बात कही है. दिल्ली पुलिस अब तक करीब 50 नेताओं व अन्य लोगों को पूछताछ में शामिल होने के लिए नोटिस जारी कर चुकी है, और कुछ नेताओं को दूसरी बार भी नोटिस जारी किया गया है.

    दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (अपराध शाखा) प्रवीण रंजन ने बताया कि, दिल्ली पुलिस से बातचीत में कुछ नेता पूछताछ में शामिल होने के लिए तैयार हो गए हैं. साथ ही, उन्होंने बताया कि इनमें सिंधु बॉर्डर के सतनाम सिंह पन्नू और सरवन सिंह पंडेर व गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे राकेश टिकैत गुट के कुछ नेता पूछताछ में शामिल होने के लिए तैयार हो गए हैं. शनिवार को देशभर में चक्का जाम के आह्वान के कारण यह लोग पूछताछ में शामिल नहीं हो रहे थे.

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    विशेष पुलिस आयुक्त ने बताया कि लाल किले हिंसा में अगर साजिश की बात सामने आती है, तो एफआईआर में देशद्रोह की धारा जोड़ी दी जाएंगी. अभी तक पुलिस ने हिंसा को लेकर एफआईआर में देशद्रोह की धारा नहीं जोड़ी है. साथ ही पुलिस जांच में डंप डाटा से पता चला है कि हिंसा के समय लाल किले पर करीब दस हजार लोग थे. ये अलग-अलग बॉर्डर से आए थे. ज्यादातर आरोपियों का मोबाइल फोन पहले बॉर्डर व हिंसा के समय लाल किले पर चल रहा था. दिल्ली पुलिस ने पंजाब, उत्तराखंड, उत्तरांचल, यूपी, हरियाणा व राजस्थान से लाइसेंस का पूरा डाटा मांग लिया है.

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    फेस रिकाग्नाईजेशन सिस्टम (एफआरएस) सिस्टम में लाईंसेस का डेटा फीड कर मौके से ली गई वीडियो फुटेज से आरोपियों की पहचान की जा रही है. प्रवीण रंजन ने बताया कि गुजरात फोरेंसिक यूनिवर्सिटी की टीमें आधुनिक साफ्टवेयर से आरोपियों की एफआरएस से पहचान कर रही है. हिंसा में 50 आरोपियों की पहचान की जा चुकी है. और अब ये जांच की जा रही है कि वे कहां के रहने वाले हैं, और किस बॉर्डर से लाल किले पहुंचे थे. दिल्ली पुलिस अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने लालकिले पर 26 जनवरी को हुई हिंसा के समय का जो डंप डाटा उठाया है, उसके मुताबिक लालकिले पर करीब दस हजार लोग थे. अगर किसी आरोपी का मोबाइल किसी बॉर्डर पर चल रहा था, और हिंसा के समय वह लालकिले पर था तो इसका मतलब है कि वो हिंसा का आरोपी है. 

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